सोमवार, 14 मार्च 2022

29 सितंबर 2018 - अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी - हिंदी लघुकथा के विविध आयाम

पूना कॉलेज में अंतरराष्ट्रीय हिंदी संगोष्ठी संपन्न

 “हिंदी लघुकथा के विविध आयाम, प्रयोजनमूलक हिंदी तथा हिंदी में रोज़गार के अवसर” विषय पर पूना कॉलेज हिंदी विभाग एवं बैंक नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति पुणे संयोजक बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र तथा शुभचिंतक फाउंडेशन पुणे के संयुक्त तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी हाल ही में संपन्न हुई. संगोष्ठी का उदघाटन बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र के उप अंचल प्रबंधक श्री सुधीर कुलकर्णी ने किया. उन्होंने भाषा के महत्व को बताते हुए हिंदी का प्रचार प्रसार करने में राजभाषा अधिकारी तथा अध्यापकों को प्रेरित किया. इंडो जपान इंटरनेशनल रिसर्च योकोहमा जपान से डॉ. राजकुमारी गौतम ने प्रमुख अतिथि मंतव्य में कहा कि लघुकथा तथा भाषा के माध्यम से हिंदी में रोज़गार के अनेक अवसर उपलब्ध हैं. मुख्य वक्ता इंदौर से लघुकथाकार तथा कवयित्री श्रीमती ज्योति जैन ने लघुकथा की परिभाषा उसका स्वरूप स्पष्ट करते हुए उसके सैधांतिक पक्ष पर अपने विचार प्रकट किए. सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष तथा नवनिर्वाचित हिंदी अध्ययन मंडल के अध्यक्ष प्रोफेसर सदानंद भोसले जी ने अपने बीजभाषण में लघुकथा तथा प्रयोजनमूलक हिंदी तथा हिंदी में रोज़गार को लेकर विविध पहलुओं पर प्रकाश डाला. प्राचार्य प्रोफेसर डॉ.आफ़ताब अनवर शेख ने उपस्थित मान्यवरों का स्वागत किया. उपप्राचार्य मोईनुद्दीन खान ने अपना शुभ सन्देश दिया. उदघाटन सत्र के अध्यक्ष ट्रस्टी मिर्ज़ा सलात बेग ने हिंदी भाषा की महत्ता को स्पष्ट करते हुए उसकी उपयोगिता बताई. उदघाटन सत्र का संचालन तथा प्रास्ताविक संयोजक डॉ. शेख मोहम्मद शाकिर ने तथा आभार उपप्राचार्य इम्तियाज़ आगा ने किया. इस अवसर पर डॉ. नीला बोरवंकर, शुभचिंतक फाउंडेशन की डॉ.नीलम जैन, डॉ. ममता जैन, श्री राज सेठी तथा बैंक के राजभाषा अधिकारी उपस्थित थे.

      प्रथम एवं द्वितीय सत्र की अध्यक्षा भोपाल से कवयित्री एवं लेखिका डॉ. लता अग्रवाल जी ने लघुकथा की संकल्पना स्पष्ट करते हुए उसके स्वरूप की चर्चा की. विषय प्रवर्तन  जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से डॉ. रहमान मुसव्विर ने किया. इस सत्र में डॉ. अशोक मरडे तुलजापुर, डॉ. विनोदकुमार वायचल उस्मानाबाद, डॉ. शोभा पवार सांगली, सयाली डोलस पुणे, सैय्यद अकबर चाँदपाशा उस्मानाबाद, डॉ.अरुणा हिरेमठ रायचूर, डॉ. सूरज चौगुले सांगली, प्रा. राजेंद्र जमदाडे पुणे, डॉ. सतीश घोरपडे सोलापुर, डॉ. शशिकांत सोनावने अमलनेर, डॉ. शीला भास्कर हुबली, प्रा. राजू पाथोरिया पुणे, डॉ. सुभाष कदम पुणे, डॉ. महमूद पटेल कड़ा,डॉ. राजेश्वरी पाटील बेलगावी, डॉ. वर्षा काम्बले सांगली, डॉ. दिलीपकुमार कसबे कराड, डॉ. कुसुम राणा औरंगाबाद, प्रा. लुटे मारुती नांदेड, डॉ. वैशाली डॉ. मस्तान शाह गोंदिया आदि ने अपने शोध आलेख प्रस्तुत किए. इस सत्र का संचालन डॉ. मेदिनी अंजनिकर मुंबई तथा आभार प्रा. अशोक घोरपडे अहमदनगर ने किया.

समापन सत्र के अध्यक्ष प्राचार्य डॉ. शहाबुद्दीन शेख, औरंगाबाद ने उपरोक्त विषय पर अपने विचार प्रकट किए. समापन सत्र का संचालन डॉ. शेख मोहम्मद शाकिर तथा आभार डॉ. बाबा शेख ने किया. संगोष्ठी को सफ़ल बनाने के लिए प्रा. रुकसाना शेख, डॉ. मो. सलिम मनियार, डॉ. भावना देशपांडे. डॉ. अश्विनी पुरुड़े, डॉ. जोहेब हसन, डॉ. आफरीन अहमद, प्रा. जावेद अख्तर, डॉ. शाहिद अंसारी, प्रा. असद शेख, डॉ. गुलाब पठान, प्रा. मुख्तार शेख, परवेज़ शेख, राखी कुमारी, नायब बिलकिस आदि ने परिश्रम लिया.   

 

                                         प्रोफेसर डॉ.आफ़ताब अनवर शेख

           प्राचार्य 





 

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