सोमवार, 14 मार्च 2022

14 सितंबर 2021 - हिंदी पखवाड़ा उदघाटन, नेहरू युवा केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में

पूना कॉलेज में हिंदी पखवाड़े का उदघाटन तथा राष्ट्रीय वेबिनार

दि. 14 सितंबर 2021

      नेहरू युवा केंद्र महाराष्ट्र कार्यालय, नेहरू युवा केंद्र पुणे तथा पूना कॉलेज हिंदी विभाग एवं आय. क्यू. ए. सी. के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी पखवाडे का उदघाटन सम्पन्न हुआ। नेहरू युवा केंद्र के उपनिदेशक यशवंत मानखेडकर ने हिंदी पखवाड़े का उदघाटन करते हुए संविधान में राजभाषा हिंदी के विकास हेतु किए जानेवाले प्रयासों की जानकारी दी। उपप्राचार्य प्रा. मोइनूद्दीन खान ने सभी उपस्थितों का स्वागत किया।  राष्ट्रीय सेवा योजना क्षेत्रीय कार्यालय पुणे के क्षेत्रीय निदेशक डी. कार्तिकेयन ने अध्यक्षीय समापन में हिंदी भाषा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होने हिंदी छात्रों, एनसीसी कैडेट्स तथा रासेयों स्वयंसेवकों को सम्मानित किया। इस अवसर पर सभी उपस्थितों ने भारत सरकार गृह मंत्रालय राजभाषा विभाग की ओर से राजभाषा प्रतिज्ञा ली।

       हिंदी पखवाड़े के अंतर्गत ऑनलाइन राष्ट्रीय वेबिनार सम्पन्न हुआ। वेबिनार की प्रस्तावना सब लेफ्टिनेंट डॉ. मो. शाकिर शेख ने की। नेहरू युवा केंद्र महाराष्ट्र के राज्य निदेशक प्रकाशकुमार मनुरे ने वेबिनार का उदघाटन करते हुए राजभाषा हिंदी का महत्व स्पष्ट किया।

      डॉ. नूरजहान रहमतुल्लाह, असम ने हिंदी के वैश्विक परिदृश्य पर अपने विचारों से अवगत कराया। उन्होने कहा कि हिंदी भाषा संपर्क भाषा है जो भारत की एकता और अखंडता को बनाए रखती है।  डॉ. अरुणा हिरेमठ, रायचूर ने हिंदी में रोजगार के अवसर पर वक्तव्य देते हुए हिंदी के महत्व और राष्ट्रभाषा की गरिमा पर अपने विचार प्रकट किए।

      प्राचार्य डॉ. आफताब अनवर शेख ने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि हिंदी को रोजगार से जोड़ना आज की प्रासंगिकता बन गयी है। वैश्वीकरण एवं बाजारवाद के युग में हिंदी भाषा  युवाओं को रोजगार देने में सक्षम है। साहित्य के अध्ययन द्वारा हम अपने व्यक्तित्व का विकास कर सकते है।

      डॉ. बाबा शेख तथा डॉ. मो. सलिम मनियार ने वेबिनार का सूत्र संचालन तथा उपप्राचार्य प्रा. इम्तियाज़ आग़ा ने ऋण निर्देश व्यक्त किया। डॉ. इमरान बेग मिर्ज़ा और प्रा. फ़ारुख शेख ने तकनीकी सहकार्य किया। प्रा. असद शेख, प्रा. इमरान शेख तथा तौसिफ़ शेख, एन.सी.सी कैडेट्स, एन.एस.एस. स्वयंसेवकों ने आयोजन के लिए सहकार्य किया।   

 

डॉ. आफताब अनवर शेख

प्राचार्य  






 

31 जुलाई 2021 - प्रेमचंद जयंती वेबिनार

जीवनसंघर्ष का मूलमंत्र प्रेमचंद साहित्य में मिलता है - डॉ. मिर्ज़ा हाशम बेग

दि. 31 जुलाई 2021

        “प्रेमचंद जी के साहित्य में सच्चे भारतीय व्यक्तित्व की झलक दिखाई देती है। उन्होने अपने संघर्षमय जीवन को हृदय में सँजोया और उसकी अभिव्यक्ति साहित्य के माध्यम से की इसीलिए उनका साहित्य बेहद संवेदनशील और मार्मिक बन पड़ा है। प्रेमचंद के पात्रों में संघर्षशील व्यक्तित्व दिखाई देता है। परिस्थिति का डटकर मुक़ाबला करना उन्हें आता है। किसी भी पात्र ने परिस्थिति के सामने घुटने नहीं टेके और न ही आत्महत्या की। जीवनसंघर्ष का मूलमंत्र प्रेमचंद साहित्य में मिलता है।“ ऐसा डॉ. मिर्ज़ा हाशम बेग, नलदुर्ग ने राष्ट्रीय वेबिनार के बीजभाषण में कहा.

       पूना कॉलेज में हिंदी विभाग एवं उर्दू, अरेबिक, पर्शियन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में मुंशी प्रेमचंद जयंती के उपलक्ष्य में वेबिनार सम्पन्न हुआ। वेबिनार की प्रस्तावना सब लेफ्टिनेंट डॉ. मो. शाकिर शेख ने की। उपप्राचार्य प्रा. इम्तियाज़ आग़ा ने सभी उपस्थित मान्यवरों का स्वागत किया।  उपप्राचार्य प्रा. मोइनूद्दीन खान ने वेबिनार का उदघाटन करते हुए उनके जीवन संघर्षों से परिचित करवाया। उन्होने कहा कि प्रेमचंद नाम का संदेश ही है – प्रेम, प्रयास और परिश्रम। प्रेमचंद के विचारों को पढ़ने, अपनाने और उन पर अमल करने की आज ज़रूरत है।

              डॉ. सुनीता यदुवंशी, कानपुर ने प्रेमचंद के उपन्यास साहित्य पर प्रकाश डाला। उन्होने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य प्रगतिवाद, मार्क्सवाद और गांधीवादी भावनाओं से ओतप्रोत है। प्रेमचंद ने यथार्थ का चित्रण किया। अपने जीवन में सच्चाई को बखूबी निभाया, जिया और साहित्य में उतारा।

       डॉ. सुरेखा मंत्री, यवतमाल ने प्रेमचंद के कहानी साहित्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रेमचंद से पूर्व साहित्य में मनोरंजन के तत्व हुआ करते थे, प्रेमचंद ने तत्कालीन सामाजिक सरोकारों से अवगत करवाया। उनके साहित्य का उद्देश्य मानवतावादी दृष्टि का विकास, समाज के सभी वर्ग का चित्रण करना है। डॉ. अब्दुल बारी, पुणे ने उर्दू साहित्य में प्रेमचंद के योगदान को लेकर बात कही।

       प्राचार्य डॉ. आफताब अनवर शेख ने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि प्रेमचंद का साहित्य आज भी प्रासंगिक है, उनके साहित्य को हम आज भी नहीं भूल पाये। प्रेमचंद सच्चे अध्यापक, पत्रकार और साहित्यकार है। उनके विचारों को पढ़कर उन्हे अपना चाहिए।

डॉ. बाबा शेख ने वेबिनार का सूत्र संचालन तथा डॉ. मो. सलिम मनियार में ऋण निर्देश व्यक्त किया। डॉ. इमरान बेग मिर्ज़ा और प्रा. फ़ारुख शेख ने तकनीकी सहकार्य किया।

       इस अवसर पर डॉ. मीता सोलंकी, डॉ. शहाबुद्दीन शेख, डॉ. माधुरी नगरकर, प्रा. लता चंद्रा, डॉ. मंगला कठारे, डॉ. सादिका नवाब सहर, डॉ. हसन खान कुलकर्णी, डॉ. मनीषा ठक्कर, डॉ. मधु वर्मा, डॉ. छाया पाटिल, डॉ. ऐनूर इनामदार, डॉ. अब्दुल अलिम, डॉ. नूरजहान रहमतुल्लाह, डॉ. पुष्पा पुष्पध, डॉ. प्रमोद पडवल, डॉ. ज्योति मूंगल, डॉ. वैशाली झगड़े, डॉ. साधना भंडारी डॉ. मनोहर जमदाले, प्रा. रुकसाना शेख आदि ऑनलाइन उपस्थित थे।  

डॉ. आफताब अनवर शेख

प्राचार्य  



 

07 जुलाई 2021 - साबुन और मास्क वितरण, गोलीबार मैदान चौक





 

10 जनवरी 2021- विश्व हिंदी दिवस प्रश्न मंजूषा


 

15 अक्तूबर 2020 - वाचन प्रेरणा दिवस



 

22 सितंबर 2020 - अंतरराष्ट्रीय वेबिनार - मीडिया और साहित्य का बदलता स्वरूप

कोविड 19 लॉक डाउन के परिप्रेक्ष्य में सोशल मीडिया, हिंदी अध्ययन अध्यापन और हिंदी का बदलता स्वरूप विषय पर अंतरराष्ट्रीय वेबिनार सम्पन्न

दि. 22 सितंबर 2020

पूना कॉलेज हिंदी विभाग एवं नेहरू युवा केंद्र पुणे के संयुक्त तत्वावधान में दि. 22 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय वेबिनार सम्पन्न हुआ। प्राचार्य डॉ. आफताब अनवर शेख, नेहरू युवा केंद्र, पुणे के जिला युवा समन्वयक यशवंत मानखेडकर के मार्गदर्शन में आयोजित इस वेबिनार में देश विदेश के विद्वानों ने 110 प्रतिभागियों को मार्गदर्शन किया।

संयोजक डॉ. शाकिर शेख ने सभी उपस्थितों का स्वागत करते हुए प्रस्तावना की।

डॉ. सदानंद भोसले, प्रोफेसर एवं अध्यक्ष, हिंदी विभाग, सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय ने बीज भाषण में कोविड 19 लॉक डाउन के परिप्रेक्ष्य में सोशल मीडिया, हिंदी अध्ययन अध्यापन और हिंदी का बदलता स्वरूप विषय पर अपने विचार व्यक्त किए।  

डॉ. नवीन चन्द्र लोहनी , पूर्व आय. सी. सी आर. चेयर, शांघई चीन ने सोशल मेडिया में हो रहे परिवर्तन पर मार्गदर्शन किया।

डॉ. नीलम जैन, साहित्यकार, यू. एस. ए. ने साहित्य के बदलते स्वरूप पर अपने विचार व्यक्त किए।

डॉ. राजकुमारी गौतम, ब्रूसेल , बेल्जियम, यूरोप ने ऑनलाइन हिंदी अध्ययन अध्यापन पद्धति पर मार्गदर्शन किया।

डॉ. शहाबुद्दीन शेख, पूर्व प्राचार्य, लोकसेवा कॉलेज, औरंगाबाद ने सोशल मीडिया और हिंदी के बदलते स्वरूप पर अपना मन्तव्य व्यक्त किया।

वेबिनार का संचालन संयोजक डॉ. बाबा शेख ने तथा आभार उपप्राचार्य इम्तियाज़ आग़ा ने किया। वेबिनार को सफल बनाने में प्रा. इमरान बेग मिर्ज़ा, डॉ. मो. सलिम मनियार, प्रा. रुकसाना शेख, खिजर शेख आदि ने परिश्रम लिया। 







 

07 मार्च 2020 - अतिथि व्याख्यान - डॉ. प्रिया ए.

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25 मार्च 2023 - इंद्रधनुष कवि सम्मेलन

पूना कॉलेज हिंदी विभाग , आय क्यू ए सी तथा प्रतिभा फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में कवि सम्मेलन इंद्रधनुष्य दि. 25   मार्च 2023   शाम...