सोमवार, 14 मार्च 2022

06 मार्च 2020- अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी - मीडिया और साहित्य का बदलता स्वरूप

सोशल मीडिया ने साहित्य के लोकतंत्रिकीकरण की प्रक्रिया को बढ़ाया

 – प्रोफेसर डॉ. दत्तात्रय मुरुमकर

     “हम इक्कीसवीं सदी में आ चुके है, लेकिन नयी पीढ़ी को लगता है कि हम उन्नीसवीं सदी में या उससे भी पहलेवाले युग में जी रहे है। यही कारण है कि हमारा मानस सदियों पुराना ही है जिसमें कुछ वर्ग का उत्पीड़न चला आ रहा है। कृषि क्रांति, औद्योगिक क्रांति, जनसंचार क्रांति और सूचना क्रांति ने हमारे भौतिक जीवन को गतिशील बनाया किन्तु हमारा मानस मात्र वैसा ही जड़, संकीर्ण, परंपरागत एवं वर्चस्ववादी ही रहा है। मीडिया पूँजीपतियों के हाथों का खिलौना बन चुका है। सोशल मीडिया ने साहित्य के लोकतंत्रिकीकरण की प्रक्रिया को बढ़ाया है। अमुक वर्ग ही लिखेगा और वही प्रकाशित होगा ऐसी स्थिति अब नहीं रही। खास करके उपेक्षितवर्ग के लिए अपनी अभिव्यक्ति का यह स्वतंत्र मार्ग अब उनके पास है।” ऐसा मन्तव्य मुंबई विश्वविद्यालय के प्रोफेसर  डॉ. दत्तात्रय मुरुमकर ने अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के अवसर पर व्यक्त किया।   

     पूना कॉलेज हिंदी विभाग, बैंक नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति पुणे, संयोजक बैंक ऑफ महाराष्ट्र, शुभचिंतक फ़ाउंडेशन तथा पृथा फ़ाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में “इक्कीसवी सदी में मीडिया और साहित्य की भूमिका” विषय पर संगोष्ठी सम्पन्न हुई। संयुक्त राष्ट्रसंघ अमेरिका में हिंदी सेवा कर चुकी डॉ. नीलम जैन ने संगोष्ठी का उदघाटन किया। डॉ. नीलम जैन ने कहा कि स्नेह और सदभावना के कारण ही आज इतनी बड़ी संख्या में प्रतिभागी उपस्थित हुए है।

     आनंद अग्रवाल ने अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के उदघाटन समारोह में कहा कि “आज की पीढ़ी ने मीडिया का सही इस्तेमाल करते हुए तकनीक के माध्यम से साहित्य का निर्माण करना चाहिए। हमे मीडिया और साहित्य की शक्ति को समझना होगा। संचार माध्यमों का उचित प्रयोग कर के युवा पत्रकारिता में अपना कैरियर बना सकते है। संचार माध्यमों में युवाओं को रोज़गार के सुनहरे अवसर आज उपलब्ध हुए है।”

      प्रोफेसर डॉ. सदानंद भोसले ने बीजभाषण में साहित्य और मीडिया मे होनेवाले बदलाव से युवाओं को और अध्यापकों को जुडने के लिए प्रेरित किया। उन्होने कहा कि यह शताब्दी सूचना और प्रौद्योगिकी की शताब्दी है। वेब मीडिया पर हिंदी में रोज़ी कमानेवाले बहुत कम है। वेब पेज बनाना हमें सीखना होगा तभी हम अत्याधुनिक पाठकों तक पहुँच सकते है। जो सीखेंगा वही कुछ पाएगा इस मंत्र के साथ उन्होने सभी उपस्थितों को प्रेरित किया।  प्राचार्य डॉ. आफताब अनवर शेख ने मीडिया और साहित्य के बदलते स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए उसके माध्यम से रोजगार के अवसर पर चर्चा की। डॉ. शाहबूद्दीन शेख के मार्गदर्शन में डॉ. कामिनी बल्लाल और डॉ. अनिता वेताल अंतरे की पुस्तकों का लोकार्पण मान्यवरों के करकमलों द्वारा हुआ।

      प्रथम सत्र मे मीडिया पर डॉ. ज्योति शर्मा, चंडीगढ़ ने विषय प्रवर्तन किया। डॉ. रहमान मुसव्विर, नई दिल्ली, ने अध्यक्षता की. इस अवसर पर डॉ. लता चौहान, बंगलुरु, मिसेस शाहताज ने अपने विचार प्रस्तुत किए। डॉ. माधुरी जोशी, डॉ. अर्चना गौतम, डॉ. नागनाथ भेंड़े, डॉ. मेदिनी अंजनीकर, डॉ. ऐनूर इनामदार, डॉ. बेबी कोलते, प्रा. जैनूद्दीन मुजावर, डॉ. बाबा गव्हाने, डॉ. राजेंद्र जमदाड़े, डॉ. पारधी, प्रा. आसमा शेख आदि ने अपने शोधालेख प्रस्तुत किए।  इस सत्र का संचालन डॉ. प्रेरणा उबाले और आभार डॉ. बालासाहेब सोनवने ने किया।

     द्वितीय सत्र में साहित्य पर मीनाक्षी भालेराव, डॉ. रहिम खान पठान, हैदराबाद ने अपने विचार व्यक्त किए। इस सत्र मे डॉ. भगवान कांबले, डॉ. विनोदकुमार वायचल, डॉ. नवनाथ गाड़ेकर, डॉ. संगीता चित्रकोटी, मुमताज़ पठान, रानी लोखण्डे, प्रा. वैशाली झगड़े, डॉ. पल्लवी पाटील, प्रा.कविता चव्हाण, प्रा. कोल्हे, डॉ. स्मृति चौधरी आदि ने अपने शोधालेख प्रस्तुत किए। मंच का संचालन ललिता गुप्ता ने तथा आभार डॉ. सलीम मनियार ने किया।

     समापन सत्र में दयानन्द कनकदन्डे, डॉ. सुरेखा मंत्री, डॉ. प्रिया. ए. ने अपने विचार व्यक्त किए। डॉ. शहाबूद्दीन शेख ने अध्यक्षता इस सत्र की अध्यक्षता की। इस अवसर पर प्रा. इम्तियाज़ आगा, प्रा. रुकसाना शेख, उपस्थित थे। डॉ. शेख मोहम्मद शाकिर ने सत्र का संचालन किया तथा डॉ. बाबा शेख ने आभार व्यक्त किया।

     130 प्रतिभागियों ने इस संगोष्ठी में सहभाग लिया। संगोष्ठी को सफल बनाने के लिए डॉ. अर्चना गौतम, डॉ. मिलिंद बनकर, डॉ. अनिल काले, डॉ. दत्तात्रय तिलेकर, डॉ. अश्विनी पुरुडे, डॉ. ज़ोहेब हसन, डॉ. अहमद शमशाद, डॉ. मो. सलीम मनियार, प्रा. जावेद अख़्तर, डॉ. गुलनवाज़, डॉ. विद्यासागर, प्रा. आसिफ खान, मोहसिन मोकाशी, सलमान, आमीर आदि ने परिश्रम लिया। 














 

14 फरवरी 2020 - नागरी लिपि राष्ट्रीय संगोष्ठी

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25 जनवरी 2020 - राष्ट्रभक्ति परक काव्य पाठ प्रतियोगिता - पृथा फ़ाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में

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23 दिसंबर 2019 - राष्ट्रीय कवि सम्मेलन - राष्ट्रीय कवि संगम के संयुक्त तत्वावधान में

युवा कवियों को मंच प्रदान करने हेतु पूना कॉलेज सदैव अग्रेसर

                          – डॉ. आफ़ताब अनवर शेख

 23 दिसंबर 2019

      “युवा कवियों को मंच प्रदान करने हेतु तथा काव्य के प्रति छात्रों की रुचि निर्माण होने हेतु पूना कॉलेज सदैव अग्रेसर है छात्रों में साहित्य सृजन के प्रति जागरूकता निर्माण हो, राष्ट्रीय कवि संगम जैसी संस्थाएं हमारे साथ मिलकर युवाओं को काव्य लेखन हेतु मार्गदर्शन करे ऐसी हमारी कामना है।” ऐसा मन्तव्य राष्ट्रीय युवा काव्यपाठ प्रतियोगिता एवं कवि सम्मेलन के समापन में अध्यक्ष प्राचार्य डॉ. आफताब अनवर शेख ने व्यक्त किया। इस अवसर पर उपप्राचार्य प्रा. मोइनूद्दीन खान, उपप्राचार्य प्रा. इम्तियाज़ आग़ा, डॉ. अब्दुल बारी, डॉ. अबरार अहमद, प्रा. जावेद अख्तर, डॉ. जोहेब, डॉ. अना मतीन, डॉ. गुलनवाज़ उस्मानी आदि उपस्थित थे। समापन सत्रह का संचालन डॉ. मोहम्मद शाकिर शेख ने तथा आभार डॉ. बाबा शेख ने किया।       

      पूना कॉलेज हिन्दी विभाग एवं राष्ट्रीय कवि संगम पुणे के संयुक्त तत्वावधान में महाविद्यालय मे पढ़ने वाले छात्रों के लिए युवा कवि कव्यापाठ प्रतियोगिता सम्पन्न हुई। इस प्रतियोगिता में 23 युवा कवियों ने अपनी कविताओं से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। वरिष्ठ कवयित्री डॉ. कांतिदेवी लोधी तथा कवयित्री प्रा. अनीता जठार ने परीक्षक की भूमिका निभाई. इस प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार 3000 रुपये अहमदनगर कॉलेज की छात्र तानिया मुलतानी, द्वितीय पुरस्कार 2,000 रुपये अमर दूधाटे, यशवंत कॉलेज नांदेड़, तृतीय पुरस्कार 1,000 रुपये पूना कॉलेज के अमान सय्यद तथा प्रोत्साहनपर पुरस्कार दो 500 रुपये फर्गुसन कॉलेज की छात्र सिमरन तथा पूना कॉलेज की छात्रा सना प्रदान किए गए। काव्य प्रतियोगिता का संचालन द्वितीय वर्ष की छात्रा शेख फरनाज़ ने तथा आभार सानिया नदाफ़ ने किया।

      राष्ट्रीय कवि संगम की संयोजिका कवयित्री प्रतिभा श्रीवास्तव और डॉ. ममता जैन, डॉ. क़मर सुरूर, कवयित्री डॉ. कांतिदेवी लोधी, कवयित्री प्रा. अनीता जठार, प्रा. उद्धव महाजन बिस्मिल, कवि आनंद सिंग, कवि अमित झा राही, कवि विनीत शंकर आदि ने युवा कवियों के सामने काव्य प्रस्तुति कर मार्गदर्शन किया। काव्य सम्मेलन का संचालन डॉ. ममता जैन ने किया। 




 

19 अक्तूबर 2019 - निबंध प्रतियोगिता




 

30 सितंबर 2019 - पोस्टर स्पर्धा

भ्रष्टाचार के खिलाफ एक साथ विषय पर पोस्टर प्रतियोगिता

दि. 03 अक्तुबर 2019

      पूना कॉलेज हिन्दी विभाग एवं ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स मण्डल कार्यालय पुणे के संयुक्त तत्वावधान में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक साथ विषय पर पोस्टर प्रतियोगिता सम्पन्न हुई।  प्रभारी प्राचार्य मोइनूद्दीन खान जी के मार्गदर्शन मे आयोजित इस प्रतियोगिता में पूना कॉलेज के 31 छात्रों ने विषय से संबन्धित पोस्टर के माध्यम से भ्रष्टाचार के विरोध मे एक साथ खड़े होकर इस अभियान मे शामिल होने का आवाहन किया। मण्डल अधिकारी श्री जगजीत सिंह ने पुरस्कार प्राप्त छात्रों को प्रमाणपत्र एवं पुरस्कार राशि प्रदान की।

       प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार मास्टर रेउबेन पवार, द्वितीय पुरस्कार तंबोली आलिशा तथा पठान सना, तृतीय पुरस्कार के सुवर्ण, प्रोत्साहनार्थ पुरस्कार शेख सलमान तथा अलफिया शेख को प्राप्त हुआ।  डॉ. सैयद इलियास और रतन गिरी ने परीक्षक की भूमिका निभाई।

       पोस्टर प्रतियोगिता का उद्घाटन श्री संजीव कुमार जी ने किया। उपप्राचार्य इम्तियाज़ आग़ा जी ने पुरस्कार वितरण समारोह में छात्रों का मार्गदर्शन किया।  कार्यक्रम का संयोजन डॉ. बाबा शेख तथा रतन गिरी ने किया। सूत्रसंचालन डॉ. शाकिर शेख ने किया। 












 

25 मार्च 2023 - इंद्रधनुष कवि सम्मेलन

पूना कॉलेज हिंदी विभाग , आय क्यू ए सी तथा प्रतिभा फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में कवि सम्मेलन इंद्रधनुष्य दि. 25   मार्च 2023   शाम...